Tuesday, April 1, 2014

आज के समय का मंत्र







आज के समय का मंत्र सीखो जीने का तंत्र !


दुनिया दिखती गोल ज़रूर पर असल में है टेढ़ी
हर कोई शक़स कर रहा यहाँ पर जगह-जगह षड्यंत्र,
आज के समय का मंत्र सीखो जीने का तंत्र !

जो भी वस्तु दिखती है वो अमूमन होती नही ,
और जो होती है वो मिलती नही चाहे ढुंढ़ो सर्वत्र,
आज के समय का मंत्र सीखो जीने का तंत्र !

 वाणी मीठी बोल के , छल जो जाते बड़े बड़े ,
सही व्यक्ति बोले कटु वचन तो मच जावे हड़कंप.
आज के समय का मंत्र , सीखो जीने का तंत्र !

किंतु - परंतु में कुछ नही शेष , बात करो सपष्ट,
जो शरमावे , इज़्ज़त दे , कपाट हो जावे बंद .
आज के समय का मंत्र , सीखो जीने का तंत्र

चोरो को जितवा-जितवा के फोड़े उन्ही के सर ठीकरा,
 सदुपयोग करो अपने मत का , बचा लो अब गणतंत्र,
आज के समय का मंत्र , सीखो जीने का तंत्र !

जीवन जीना सरल नही , व्यर्थ में करे जो चिंतन,
किस्मत से अब फल ना मिलता , करना पड़े संघर्ष
आज के समय का मंत्र , सीखो जीने का तंत्र !

कहत विनय सुनो भाई-बहनो , मत करो तुम द्वेष
पैसे, खुशी और सफलता का कही ना बिकता यंत्र
आज के समय का मंत्र , सीखो जीने का तंत्र !
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लेखक- विनय सिंगला
समय - एक एप्रिल , सन् 2014


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